नई दिल्लीः भारत के बेटे शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में 20 दिन और अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन बिताने के बाद आज पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए हैं। शुभांशु शुक्ला और अन्य क्रू सदस्यों को लेकर ड्रैगन कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरा। शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्षयान कल यानि 14 जुलाई शाम लगभग 4.45 बजे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से अनडॉक हो गया था और लगभग 22 घंटे की यात्रा करके स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ‘ग्रेस’ आज दोपहर लगभग 3 बजे कलिफोर्निया तट के पास सुरक्षित उतरा है...बता दें कि 41 साल बाद शुभांशु अंतरिक्ष में कदम रखने वाले दूसरे भारतीय बने हैं ....इससे पहले साल 1984 में राकेश शर्मा सोवियत संघ के सोयुज टी-11 मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए थे..शुभांशु की सफल वतन वापसी से उनके माता – पिता और देश का हर नागरिक गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ...
प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी पर खुशी व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लिखा, 'मैं पूरे देश के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूँ, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है। यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।'
उल्लेखनीय है कि शुभांशु को इसरो की ओर से नासा के एक्सिओम 4 मिशन के लिए चुना गया था जिसके तहत शुभांशु और तीन अन्य अंतरिक्षयात्री- मिशन कमांडर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोस्ज उजनांस्की-विस्नीवस्की, हंगरी के टिबोर कापू 26 जून को आइएसएस पर पहुंचे थे। इन अंतरिक्षयात्रियों ने आईएसएस से जुड़ने के बाद से लगभग 76 लाख मील की दूरी तय करते हुए पृथ्वी के चारों ओर लगभग 433 घंटे या 18 दिन तक 288 परिक्रमाएं की ...रविवार को आईएसएस में हुई फ़ेयरवेल सेरेमनी में शुभांशु शुक्ला ने भारत के लिए संदेश दिया था जहां उन्होने कहा था "आज का भारत महत्वाकांक्षी दिखता है. आज का भारत निडर दिखता है, आज के भारत में आत्मविश्वास दिखता है. आज का भारत गर्व से पूर्ण है. इन्हीं सब कारणों की वजह से, मैं एक बार फिर से कह सकता हूँ कि आज का भारत अभी भी 'सारे जहाँ से अच्छा' दिखता है. जल्द ही धरती पर मुलाक़ात करते हैं.”
बात करें शुभांशु के 18 दिन के अंतरिक्ष मिशन के तो शुभांशु शुक्ला ने हर दिन 16 सूर्योदय और सूर्यास्त देखे क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से घूमता है. एक्सिओम-4 मिशन की अंतरिक्ष यात्रा 25 जून को शुरू हुई थी जब ड्रैगन अंतरिक्ष कैप्सूल को ले जाने वाला फाल्कन-9 रॉकेट फ्लोरिडा से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर रवाना हुआ था. आईएसएस पर शुभांशु शुक्ला ने भारत-विशिष्ट सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण प्रयोग किया, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमताओं का प्रदर्शन हुआ. ये प्रयोग भविष्य के ग्रहीय मिशनों और लंबी अवधि के अंतरिक्ष निवास के लिए महत्वपूर्ण डेटा उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इस मिशन की सफलता के बाद भविष्य में होने वाले इसरो के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा और संभवता शुभांशु इसके प्रमुख अंग रहेंगे |
शुभांशु के आगमन को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल है ...उनके स्वागत के लिए उनका घर चारों तरफ से सजा हुआ है.. उनके परिवार ने शिव मंदिर में रुद्राभिषेक किया है ... उनके पिता शम्भू दयाल शुक्ला ने बताया, 'जब अंतरिक्ष यान अलग हो रहा था, तो हम प्रार्थना कर रहे थे। हम चुपचाप प्रार्थना करते रहे और उम्मीद करते रहे कि सब ठीक हो जाएगा। जैसे ही हमने सुना कि सब ठीक है, हमने राहत की सांस ली। हमें गर्व है कि उन्होंने यह मिशन सुरक्षित रूप से पूरा किया. अब, हम उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं, तभी हमें शांति मिलेगी।'
शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने भी बेटे के सफल घर वापस आने पर ख़ुशी जाहिर की और कहा, 'एक मां होने के नाते, मैं हमेशा अपने बच्चों के लिए प्रार्थना करती हूं, लेकिन इस मिशन की शुरुआत से, मैं हर दिन और भी अधिक प्रार्थना कर रही हूं। मैं लगातार उनके बारे में सोचती रहती हूं - क्या वह ठीक से खा रहे हैं, पर्याप्त आराम कर रहे हैं और क्या वह सुरक्षित हैं। हमने घर पर विशेष प्रार्थनाएं कीं, दीपक जलाए और फूल चढ़ाए और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की।'
आज देश का हर नागरिक अपने बेटे की सफल वापसी को लेकर बेहद खुश है ..उत्साहित है ..पुरे देश में उत्सव मनाया जा रहा है .... अब बस शुभांशु के शुभ कदम भारत में पड़ने का इंतज़ार है |
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